Sunday, October 16, 2016

एक मुक्तक

हुनरमंदी चन्द सिक्कों में सिमटती जा रही हैं,
ख़्वाहिशें कम हो रहीं हैं, उम्र बढ़ती जा रही है,
मैं कहीं राजा, कहीं जोकर, कहीं बनता ग़ुलाम,
ज़िन्दगी यह ताश के पत्तों सी बंटती जा रही है ।
मैं किताबों में कहीं खोया था, बस यह सोचकर,
याद कर के वो मुझे, पन्ने पलटती जा रही है ।

एक सैनिक की अभिलाषा !

मुझे न देना धन और दौलत या कोई सम्मान,
बस इतनी सी ख्वाहिश पूरी करना हे भगवान !
मन में कुछ अभिलाषाएं हैं, दिल में हैं अरमान,
बस आगे ही आगे बढ़ता जाए हिंदुस्तान !
हो सबसे आगे हिन्दुस्तान,
यह अपना प्यारा हिन्दुस्तान ।
हो सबसे आगे हिन्दुस्तान,
यह अपना प्यारा हिन्दुस्तान ।

1.
घर से निकले जब बेटी तब,
कोई डर न सताये ।
कभी न मन घबराये !
उसके सुन्दर चेहरे पर
तेज़ाब न डाला जाये,
तेज़ाब न डाला जाये !
फिर दहेज़ के लालच में,
कोई बहू जलाई न जाये,
कोई बहू जलाई न जाये ।
और किसी कन्या की हत्या,
गर्भ में न हो जाये,
गर्भ में न हो जाये ।
आज बेटियां बढ़ा रही हैं
अपने देश की शान,
देश की हर एक नारी का
हमें करना है सम्मान !
तभी तो बनेगा देश महान,
हो सबसे आगे हिन्दुस्तान !

2.
देश तरक्की करे, चाँद तक,
क्या मंगल तक जाये,
कोई रोक न पाये ।
याद रहे पर धरती पे कोई,
भूखा न रह जाये ।
भूख से न मर जाये !
भ्रष्टाचार, अशिक्षा, बेकारी
को दूर भगायें !
आओ हाथ बढ़ाएं
निर्मल भारत के सपने को,
मिलकर सत्य बनायें,
आओ वृक्ष लगायें !
जितना सेवा करता सैनिक,
उतनी करे किसान,
अगर देश की शक्ति है सैनिक,
तो है नींव किसान !
के दोनों से है हिन्दुस्तान !
यह अपना भारत देश महान !

3.
जब हम हों सीमा पे डटे,
तब शहर में दंगा न हो,
घर में दंगा न हो !
जाति धर्म के नाम पे
अपमानित यह तिरंगा न हो !
घर में दंगा न हो !
धर्म के ठेकेदारों के बहकावे में मत आना,
तुम कहीं बहक न जाना,
प्यार मोहब्बत की धरती पर
नफरत मत उपजाना,
तुम कहीं बहक न जाना ।
कहीं न फाड़ी जाए गीता,
कहीं जले न कुरआन,
राम के घर में ईद मने,
होली खेले रहमान ।
बनेगा तब यह देश महान,
हो सबसे आगे हिन्दुस्तान ।
मुझे न देना धन और दौलत या कोई सम्मान,
बस इतनी सी ख्वाहिश पूरी करना हे भगवान !
हो सबसे आगे हिन्दुस्तान ।
हो सबसे आगे हिन्दुस्तान ।

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अम्बेश तिवारी